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| आँखों पर शायरी |
१.जब तक आँखे है तेरी रहगुजर दिखेंगे
वो कब तुम्हे दी-दा-ऐ तर देखेंगे
जाने वाले तो फ़क़त अपना सफर देखेंगे
इस से आगे का हर फैसला तुम पर छोड़ा
जाते जाते हम तुम्हे एक नजर देखेंगे
तेरे कदमो से लिपटती हुई मिट्टी की कसम
जब तक आँखे है तेइ रहगुजर देखेंगे !
नशीली आखे देखते ही शायर की कलम चलने लगती ही,वो आखो की ख़ूबसूरती में डूब कर सायरी करने लगता ह !
इसीलिए कई सायरो ने आखो ल\को अलग अलग नाम दिया ह और सायरी की कल्पना की है
२.कैद खाने में है बिन सलाखो
कैद खाने में है बिन सलाखों के
कुछ यु चर्चे है तुम्हारी आँखों के



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